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मंगलवार, 20 जुलाई 2010

खुशियाँ समेट

अक्स किसका संजोया है
इन आँखों मे हमने,
बीत गए
दिन, महीने औ साल
न जान पाए
उस अक्स मे
है कौन शख्स?

किसका अरमान है
दिल मे है कौन?
कौन है
इन धडकनों मे आज?

सिर्फ महसूस होती है
एक आवाज
अपने आस पास
एक ख़ास
जो कहती है

अपने होने का एहसास मत खो
मत जाने दे आज
जो तुझमे है
जो तू है,
क्यों खोती जा रही है
तू खुद को
आजा अपने करीब आ
पहचान ले खुद को
खुद के नसीब को
छोड़ दे उसे
जो तेरा नहीं है
अपने दामन मे
अब बस खुशियाँ समेट!

3 टिप्‍पणियां:

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

अपने होने का एहसास मत खो
मत जाने दे आज
जो तुझमे है
जो तू है,
क्यों खोती जा रही है
तू खुद को
आजा अपने करीब आ
पहचान ले खुद को

chhoti umr me bahut badi baat kah di tumne. itni gahraai, itna bhawbodh to bado-bado kr paas bhi nahin. Tum meera ho, mmmmmmMahadevi ho aaj ki.

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

अपने होने का एहसास मत खो
मत जाने दे आज
जो तुझमे है
जो तू है,
क्यों खोती जा रही है
तू खुद को
आजा अपने करीब आ
पहचान ले खुद को

Bahut badi baat kah di tumne itni chhoti umr me.

Shilpi ने कहा…

thanks papa!