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बुधवार, 10 मार्च 2010

टूटके बिखर जाते तो अच्छा था.......
राहों पे निकल गए ये क्या बात है,
राहों में बिखर जाते तो अच्छा था ......
बेदिली से मुस्कुरातें हैं आज हम,
दिल को यूं न बहलाते तो अच्छा था......
रन्जो गम के बन गए हैं अब हम,
बाशिंदे यूं दिल ही न किसी से लगाते तो अच्छा था......
मुस्कुराहटों का उन के होंठों न आना जला गया हमें यूं
कि उनके पास हम ना जाते तो अच्छा था......

11 टिप्‍पणियां:

नरेश सिह राठौङ ने कहा…

सुन्दर रचना है | http://myshekhawati.blogspot.com

राकेश कौशिक ने कहा…

"रन्जो गम के बन गए हैं अब हम बाशिंदे,
यूं दिल ही न किसी से लगाते तो अच्छा था......"
सार्थक रचना - शुभकामनाएं

अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

kshama ने कहा…

मुस्कुराहटों का उन के होंठों न आना जला गया हमें यूं
कि उनके पास हम ना जाते तो अच्छा था......
Ek dard liye hue hai yah sundar rachana

कौशल तिवारी 'मयूख' ने कहा…

मेरे मरने के बाद मेरे कब्र में न आना |
आना , लेकिन फुल न चढ़ाना |
mai पहले से दबा हूँ
मुझे और न दबाना |

संजय भास्कर ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
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Amit K Sagar ने कहा…

अच्छा लिखा है.
जारी रहें.

uthojago ने कहा…

great effort

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } ने कहा…

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

कलम के पुजारी अगर सो गये तो

ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

संगीता पुरी ने कहा…

इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

Shilpi ने कहा…

आप सबके महत्वपूर्ण समय के लिए धन्यवाद्! आप सबको पढ़कर लगा कि आज भी लोगो में साहित्य के प्रति रुझान कम नहीं हुआ है|