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शनिवार, 13 अगस्त 2011

अंतर- भारतवर्ष और इंडिया में!



किसको, इस देश को?
इस 'इंडिया' को? इंडिया कहे जाने वाले भारत को?
हाँ, जानती तो हूँ, पर अधिक नहीं !
जानती-पहचानती हूँ, उस "भारतवर्ष" को -
जो कभी कहलाता था - "सोने की चिड़िया"
लेकन कभी संग्राहक नहीं था, सोने का!!
था जिसे विश्वास त्यागमय भोग पर,
था जिसका आदर्श सूत्र - "तेन त्यक्तेन भुजिथा"!!!

जानती हूँ मैं, उस भारत्वढ़ को,
जहाँ, ठुराए गए थे, 'राजमुकुट'!
जहाँ, मरी गयी थीं ठोकरें,
विलासिता को, राज्य को, साम्राज्य को!!
जहाँ, योग्यता और प्रतिभा महलों मे नहीं,
आरण्यको-जंगलों मैं बस्ती थी!
जहाँ वृक्ष, काटे नहीं पूजे जाते थे!!
और यह समाज,
अरण्य और अरन्यकों का शोषण नहीं,
भरपूर, पर्याप्त पोषण करता था!!!
प्रतिभाएं करती थी तो और शोध,
राज्य की समृधि के लिए!
और राज्य रहता था कृतज्ञ, इस त्याग - तपस्या हेतु!!!

जानती हूँ उस भारत को,
जहाँ तौल दिया गया था,
अपने ही शारीर का मांस, कटकर निज-हांथों,
किसी पशु-पक्षी की प्राण रक्षा हेतु!!
जहाँ चलाये गए थे आरे, माता-पिता द्वारा
अपने ही पुत्र को दो पहाड़ करने के लिए,
सत्य और संस्कृति की संरक्षा के लिए!!!

जहाँ लिया गया था 'कर'
पिता द्वारा अपने ही मृत पुत्र की अंत्येष्टि के लिए!
विलाप करती दुखियारी पत्नी से,
अंग-लिपटी हुयी फटी साडी का अर्धभाग!
बात निष्ठा के साथ, कर्त्तव्य पालन की जो थी!!!

जानती हूँ, उस भारतवर्ष को,
जहाँ के राजकुमार शेर के दन्त गिनते थे,
जहाँ के क्षत्रप, शेरनी का दूध लाते थे!
जहाँ की धाय भी, देश भक्ति के नाम पर,
अपने कलेजे के टुकड़े को, राजकुमार बता,
आँखों के समक्ष, बलिदान कर देती थी,
लेकिन राज्य को विधर्मियों से बचा लेती थी!!

जानती हूँ, उस भारतवर्ष को भी,
जब नेतृत्व भटक गया गया था, बुद्धि-विवेक-नेत्रों पर पट्टी बांध लिया था,
सोने की चकाचौंध में,
तब सत्य और न्याय के लिए,
यहाँ हुआ करता था कभी - 'महाभारत'!!
उस महाभारत से निकला था - 'गीतामृत'!
जिसे कर सकते हैं हम सब, आज भी "पान"
लेकिन करते नहीं!!!

यादे कर रहे होते
क्यों दिखती ऐसी अराजकता?
ऐसे अनाचार, अत्याचार और भ्रष्टाचार??
क्यों जानू ऐसे इंडिया को जहाँ कंक्रीट और सीमेंट ही नहीं,
गटक लिए जाते हैं जहाँ पूरी की पूरी सड़क और पुल !!!

3 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 14 - 08 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
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रचना दीक्षित ने कहा…

क्यों दिखती ऐसी अराजकता?
ऐसे अनाचार, अत्याचार और भ्रष्टाचार??
क्यों जानू ऐसे इंडिया को जहाँ कंक्रीट और सीमेंट ही नहीं,
गटक लिए जाते हैं जहाँ पूरी की पूरी सड़क और पुल !!!

पुराने इतिहास की गौरवगाथा को भुलाते हुए हम कहाँ पहूँच गए है. आश्चर्य होता है.

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

एक बेहद ही गौरवशाली सांस्कृतिक , वैज्ञानिक , आध्यात्मिक इतिहास रहा हमारा आज हम कहाँ पहुंचे .....भूले... बसेरे से दूर ...